मुझसे हाथ मिला मुझसे बात भी कर
मुझसे नाराज भी हो मुलाक़ात भी कर
मेरे नजदीक भी आ मुझसे दूर भी जा
मुझसे मुहब्बत मुझसे फसादात भी कर
कभी मंदिर जा कभी सहेलियों के घर भी
कभी चैन से बैठ कभी खुराफात भी कर
राज छुपा भी ले दिल के राज बता भी दे
गुमसुम भी रह और हंसकर बात भी कर
बेदिल ग़ज़ल भी लिख ले मक़ता भी बना
और मिस्रा-ए-सानी की शुरुआत भी कर
Saturday, October 31, 2009
Wednesday, October 28, 2009
दीप कहीं, कहीं दिल जलते हैं
दीप कहीं, कहीं दिल जलते हैं
खुशियां कहीं, कहीं गम पलते हैं।
कोई अकेला ही बढ़ता है,
साथ किसी के दल चलते हैं।
दीप कहीं, कहीं दिल जलते हैं।
किसी किस्मत में है बस रोना,
कोई बिना बजह ही हंसते हैं।
दर्द का कहर न ढलता देखो
जीवन पल का, ज्यों वर्षों लगते हैं ।।
खुशियां कहीं, कहीं गम पलते हैं।
कोई अकेला ही बढ़ता है,
साथ किसी के दल चलते हैं।
दीप कहीं, कहीं दिल जलते हैं।
किसी किस्मत में है बस रोना,
कोई बिना बजह ही हंसते हैं।
दर्द का कहर न ढलता देखो
जीवन पल का, ज्यों वर्षों लगते हैं ।।
क्या समझाइये दिल को, कि कोई ज़ोर ना रहा
क्या समझाइये दिल को, कि कोई ज़ोर ना रहा
वह जिंदगी में क्या आए कि कोई और ना रहा
अब क्या रोकिए दिल की उड़ान को
जिसके बंधे रुके, वो डोर ना रहा
कोई बताए कहां रुकें, कहां जाएं हम
अब तो कोई मंज़िल, कोई ठौर ना रहा
सांसें, दिल की धड़कनें कहती हैं - जिंदा हैं हम
वो जिंदगी क्या, जो इश्क में सराबोर ना रहा
अब कौन देखे चांद को खामोश निगाहों से
वो इश्क क्या जिसमें कोई शोर ना रहा
वो कहते हैं कुछ बेअदब सा हो चला है "नन्हे"
इश्क का मारा है, अब कोई सलीका, कोई तौर ना रहा
वह जिंदगी में क्या आए कि कोई और ना रहा
अब क्या रोकिए दिल की उड़ान को
जिसके बंधे रुके, वो डोर ना रहा
कोई बताए कहां रुकें, कहां जाएं हम
अब तो कोई मंज़िल, कोई ठौर ना रहा
सांसें, दिल की धड़कनें कहती हैं - जिंदा हैं हम
वो जिंदगी क्या, जो इश्क में सराबोर ना रहा
अब कौन देखे चांद को खामोश निगाहों से
वो इश्क क्या जिसमें कोई शोर ना रहा
वो कहते हैं कुछ बेअदब सा हो चला है "नन्हे"
इश्क का मारा है, अब कोई सलीका, कोई तौर ना रहा
Monday, October 26, 2009
हे प्रिय,मुझे इतना अधिकार तो दो
हे प्रिय,मुझे इतना अधिकार तो दो
मेरे मन की मरुभूमि पर प्यार के फूल खिलने तो दो
मेरी सब आशाओं को एक नई दिशा तो दो
मन के सब कल्पित भावों को साकार रूप लेने तो दो
हे प्रिय मुझे इतना अधिकार तो दो
मेरे मन की मरुभूमि पर प्यार के फूल तो खिलने दो
अंधकार में भटक रहा था तन्हाइयों में जीता था
हे प्रिय मेरे मन के अंधकार को,
मेरी सब तबाहियों को एक नया उजाला दो
हे प्रिय, मुझे इतना अधिकार तो दो
मेरे मन की मरुभूमिक पर प्यार के फूल खिलने तो दो।
जीवन की आपाधापी में मन लघु हो जाता है
जीवन की आपाधापी में मन कटु हो जाता है
हे प्रिय मेरे मन की लघुता को
मेरे मन की कटुता को आशाओं से धुलने दो।
हे प्रिय ममुझे इतना अधिकार तो दो
मेरे मन की मरुभूमि पर प्यार के फूल तो खिलने दो।
मेरे मन की मरुभूमि पर प्यार के फूल खिलने तो दो
मेरी सब आशाओं को एक नई दिशा तो दो
मन के सब कल्पित भावों को साकार रूप लेने तो दो
हे प्रिय मुझे इतना अधिकार तो दो
मेरे मन की मरुभूमि पर प्यार के फूल तो खिलने दो
अंधकार में भटक रहा था तन्हाइयों में जीता था
हे प्रिय मेरे मन के अंधकार को,
मेरी सब तबाहियों को एक नया उजाला दो
हे प्रिय, मुझे इतना अधिकार तो दो
मेरे मन की मरुभूमिक पर प्यार के फूल खिलने तो दो।
जीवन की आपाधापी में मन लघु हो जाता है
जीवन की आपाधापी में मन कटु हो जाता है
हे प्रिय मेरे मन की लघुता को
मेरे मन की कटुता को आशाओं से धुलने दो।
हे प्रिय ममुझे इतना अधिकार तो दो
मेरे मन की मरुभूमि पर प्यार के फूल तो खिलने दो।
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