Monday, October 26, 2009

हे प्रिय,मुझे इतना अधिकार तो दो

हे प्रिय,मुझे इतना अधिकार तो दो
मेरे मन की मरुभूमि पर प्यार के फूल खिलने तो दो
मेरी सब आशाओं को एक नई दिशा तो दो
मन के सब कल्पित भावों को साकार रूप लेने तो दो
हे प्रिय मुझे इतना अधिकार तो दो
मेरे मन की मरुभूमि पर प्यार के फूल तो खिलने दो
अंधकार में भटक रहा था तन्हाइयों में जीता था
हे प्रिय मेरे मन के अंधकार को,
मेरी सब तबाहियों को एक नया उजाला दो
हे प्रिय, मुझे इतना अधिकार तो दो
मेरे मन की मरुभूमिक पर प्यार के फूल खिलने तो दो।
जीवन की आपाधापी में मन लघु हो जाता है
जीवन की आपाधापी में मन कटु हो जाता है
हे प्रिय मेरे मन की लघुता को
मेरे मन की कटुता को आशाओं से धुलने दो।
हे प्रिय ममुझे इतना अधिकार तो दो
मेरे मन की मरुभूमि पर प्यार के फूल तो खिलने दो।

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