दीप कहीं, कहीं दिल जलते हैं
खुशियां कहीं, कहीं गम पलते हैं।
कोई अकेला ही बढ़ता है,
साथ किसी के दल चलते हैं।
दीप कहीं, कहीं दिल जलते हैं।
किसी किस्मत में है बस रोना,
कोई बिना बजह ही हंसते हैं।
दर्द का कहर न ढलता देखो
जीवन पल का, ज्यों वर्षों लगते हैं ।।
Wednesday, October 28, 2009
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