Saturday, August 29, 2009
Tuesday, August 18, 2009
दूर रह सके जो
दूर रह सके जो हम से , दम कहां मंज़िल में है ?
झुका दे जो आसमां , हौसला वो दिल में है
दूर रह सके जो हमसे , दम कहां मंज़िल में है...
विश्वास से उठे जो कदम , चट्टानों पर निशान छोड़ जाएंगे
रोक सके जो हमें , दम कहां तूफ़ानों में है
दूर रह सके जो हम से , दम कहां मंजिल में है...
ए मां तेरे दूध की स्याही से वक़्त के चहरे पे वो दास्तान लिख जाएंगे
भुला सके जिसे ये जहां , दम कहां जमाने में है
दूर रह सके जो हम से दम कहां मंजिल में है ...
जो करने इस जहां में आए थे वो करके ही जाएंगे
बदल सके जो हमारे इरादे दम कहां किस्मत में है
दूर रह सके जो हम से दम कहां मंज़िल में है...
एक दिन धरती की गोद में सिर रख कर सो जाएंगे
जगा सके जो फिर हमें वो दर्दे पुकार कहां तेरी चाहत में है
दूर रह सके जो हम से दम कहाँ मंज़िल में है ...
झुका दे जो आसमां , हौसला वो दिल में है
दूर रह सके जो हमसे , दम कहां मंज़िल में है...
विश्वास से उठे जो कदम , चट्टानों पर निशान छोड़ जाएंगे
रोक सके जो हमें , दम कहां तूफ़ानों में है
दूर रह सके जो हम से , दम कहां मंजिल में है...
ए मां तेरे दूध की स्याही से वक़्त के चहरे पे वो दास्तान लिख जाएंगे
भुला सके जिसे ये जहां , दम कहां जमाने में है
दूर रह सके जो हम से दम कहां मंजिल में है ...
जो करने इस जहां में आए थे वो करके ही जाएंगे
बदल सके जो हमारे इरादे दम कहां किस्मत में है
दूर रह सके जो हम से दम कहां मंज़िल में है...
एक दिन धरती की गोद में सिर रख कर सो जाएंगे
जगा सके जो फिर हमें वो दर्दे पुकार कहां तेरी चाहत में है
दूर रह सके जो हम से दम कहाँ मंज़िल में है ...
कान्हा के प्यार में मीरा है बन जाना
कान्हा के प्यार में में बन जाना चाहती मीरा,
हर जनम में उनका साथ मुझे है पाना,
हर जनम में उनका साथ मुझे है पाना,
| कान्हा के नाम जपने में खुद को मुझे है भुलाना, कान्हा की भक्ति के रंग में खुद को है रंगाना, |
| कान्हा के प्यार में मीरा है बन जाना ! |
| कान्हा की बांसुरी कि धुन पर उनके साथ रास लीला रचाना, |
| बांसुरी कि धुन को सुनकर अपनी सुध बुध भुलाना! |
| कान्हा की छवि मेरे तन-मन को लुभाती, |
| कान्हा के दर्शन करने को में दौड़ी चली जाती, |
| कान्हा के प्यार में में मीरा बन जाती ! |
| कान्हा के प्यार में में मीरा बन जाती, |
| उनका सांवला सलोना रूप देख कर भी |
| आंखें वहां से नहीं में हटा पाती ! |
| कान्हा के प्रेम में में मीरा बन जाती, |
| हर तरफ उनको ही देखने को मेरी आंखें हैं ललचाती! |
सोचता हूं उसे क्या नाम दिया जाए
सोचता हूं उसे क्या नाम दिया जाए,
जिसने कत्ल किया इनाम दिया जाए ।
आओ बदल दें दुनिया के रीति रिवाज,
जहर के बदले भी जाम दिया जाए ।
ग़रीबों पर ज़ुल्म हमेशा ही रहे हैं इधर,
आओ मिलकर इसे थाम दिया जाए ।।
भ्रष्टाचारी बेईमानी भागकर थक गये,
सोचता हूं सदियों तक आराम दिया जाए।
जिसने कत्ल किया इनाम दिया जाए ।
आओ बदल दें दुनिया के रीति रिवाज,
जहर के बदले भी जाम दिया जाए ।
ग़रीबों पर ज़ुल्म हमेशा ही रहे हैं इधर,
आओ मिलकर इसे थाम दिया जाए ।।
भ्रष्टाचारी बेईमानी भागकर थक गये,
सोचता हूं सदियों तक आराम दिया जाए।
उस रोज़ मेरे नगमों का अंदाज देखना
जिस रोज़ हर पेट को रोटी मिल जाएगी
जिस रोज़ हर चेहरा हंसता नज़र आएगा
जिस रोज़ नंगे बदन कपड़ों से ढके होंगे
जिस रोज़ खुशियों में वतन डूब जाएगा
उस रोज़ मेरे नगमों का अंदाज़ देखना
मेरी आवाज़ में एक नई आवाज़ देखना ।।
जिस रोज़ किसानों के भरे खलिहान होंगे
और रोज़गारशुदा वतन के नौजवान होंगे
जिस रोज़ पसीने की सही कीमत मिलेगी
इन महलों से बड़े जिस रोज़ इन्सान होंगे
उस रोज़ मेरे नगमों का अंदाज़ देखना
मेरी आवाज़ में एक नई आवाज़ देखना ।।
जिस रोज़ राह में कोई अबला न लुटेगी
जिस रोज़ दौलत से कोई जान न मिटेगी
जिस रोज़ यहां जिस्म के बाज़ार न लगेंगे
जिस रोज़ डोली दर से कोई सूनी न उठेगी
उस रोज़ मेरे नग्मों का अंदाज़ देखना
मेरी आवाज़ में एक नई आवाज़ देखना ।।
ये हाथ पसारे मासूम बचपन हजारों
जिस रोज़ मुझे राह में घूमते न दिखेंगे
जिस रोज़ ज़र्द, पिचके वीरान चेहरों पे
भूख के नाचते-गाते बादल न दिखेंगे
उस रोज़ मेरे नग्मों का अंदाज़ देखना ।।
जिस रोज़ हर चेहरा हंसता नज़र आएगा
जिस रोज़ नंगे बदन कपड़ों से ढके होंगे
जिस रोज़ खुशियों में वतन डूब जाएगा
उस रोज़ मेरे नगमों का अंदाज़ देखना
मेरी आवाज़ में एक नई आवाज़ देखना ।।
जिस रोज़ किसानों के भरे खलिहान होंगे
और रोज़गारशुदा वतन के नौजवान होंगे
जिस रोज़ पसीने की सही कीमत मिलेगी
इन महलों से बड़े जिस रोज़ इन्सान होंगे
उस रोज़ मेरे नगमों का अंदाज़ देखना
मेरी आवाज़ में एक नई आवाज़ देखना ।।
जिस रोज़ राह में कोई अबला न लुटेगी
जिस रोज़ दौलत से कोई जान न मिटेगी
जिस रोज़ यहां जिस्म के बाज़ार न लगेंगे
जिस रोज़ डोली दर से कोई सूनी न उठेगी
उस रोज़ मेरे नग्मों का अंदाज़ देखना
मेरी आवाज़ में एक नई आवाज़ देखना ।।
ये हाथ पसारे मासूम बचपन हजारों
जिस रोज़ मुझे राह में घूमते न दिखेंगे
जिस रोज़ ज़र्द, पिचके वीरान चेहरों पे
भूख के नाचते-गाते बादल न दिखेंगे
उस रोज़ मेरे नग्मों का अंदाज़ देखना ।।
तेरी आंखों की कशिश
तेरी आंखों की कशिश मुझे याद है अब तक
तेरी बातों की खलिश मुझे याद है अब तक
तुम पराए हो मगर अपना बनाने की तुम्हें
मेरी नाकाम सी कोशिश मुझे याद है अब तक
मेरे खामोश से दिल में हलचल सी मचाने की
हर रोज नई साजिश मुझे याद है अब तक
चाहा था तुम्हारी मोहब्बत हो मेरा हासिल
पर तारों की वो गर्दिश मुझे याद है अब तक
वो प्यार तुम्हारा था मेरी गलतफहमी
मेरी वो कशमकश मुझे याद है अब तक
भूला नहीं हूं अब तक तगाफुल वो तुम्हारे
और अपनी प्रस्तिश मुझे याद है अब तक
मुझे ये खबर है पूरी होगी ना कभी भी
मेरे दिल की वो ख्वाहिश मुझे याद है अब तक
नादानियों की गिनती बढ़ती ही रही मेरी
तुझसे उल्फत की गुजारिश मुझे याद है अब तक
इकरारे मोहब्बत में होठों की तुम्हारे
हल्की सी वो जुंबिश मुझे याद है अब तक
तेरी बातों की खलिश मुझे याद है अब तक
तुम पराए हो मगर अपना बनाने की तुम्हें
मेरी नाकाम सी कोशिश मुझे याद है अब तक
मेरे खामोश से दिल में हलचल सी मचाने की
हर रोज नई साजिश मुझे याद है अब तक
चाहा था तुम्हारी मोहब्बत हो मेरा हासिल
पर तारों की वो गर्दिश मुझे याद है अब तक
वो प्यार तुम्हारा था मेरी गलतफहमी
मेरी वो कशमकश मुझे याद है अब तक
भूला नहीं हूं अब तक तगाफुल वो तुम्हारे
और अपनी प्रस्तिश मुझे याद है अब तक
मुझे ये खबर है पूरी होगी ना कभी भी
मेरे दिल की वो ख्वाहिश मुझे याद है अब तक
नादानियों की गिनती बढ़ती ही रही मेरी
तुझसे उल्फत की गुजारिश मुझे याद है अब तक
इकरारे मोहब्बत में होठों की तुम्हारे
हल्की सी वो जुंबिश मुझे याद है अब तक
Monday, August 10, 2009
अपने दिल को पत्थर का बना कर रखना
अपने दिल को पत्थर का बना कर रखना
हर चोट के निशान को सजा कर रखना ।।
उड़ना हवा में खुल कर लेकिन,
अपने कदमों को ज़मीं से मिलाकर रखना ।।
छाव में माना सुकून मिलता है बहुत,
फिर भी धूप में खुद को जलाकर रखना ।।
उम्रभर साथ तो रिश्ते नहीं रहते,
यादों में हर किसी को जिन्दा रखना ।।
वक्त के साथ चलते-चलते, खो न जाना,
खुद को दुनिया से छिपाकर रखना ।।
रातभर जाग कर रोना चाहो जो कभी,
अपने चेहरे को दोस्तों से छिपाकर रखना ।।
तूफानों को कब तक रोक सकोगे तुम,
कश्ती और मांझी का याद पता रखना ।।
हर कहीं जिन्दगी एक सी ही होती है,
अपने ज़ख्मों को अपनों को बताकर रखना ।।
मन्दिरों में ही मिलते हों भगवान जरूरी नहीं,
हर किसी से रिश्ता बना कर रखना ।।
मरना जीना बस में कहां है अपने,
हर पल में जिन्दगी का लुफ्त उठाए रखना ।।
दर्द कभी आखरी नहीं होता,
अपनी आंखों में अश्कों को बचाकर रखना ।।
सूरज तो रोज ही आता है मगर,
अपने दिलो में दीप जलाकर रखना ।।
हर चोट के निशान को सजा कर रखना ।।
उड़ना हवा में खुल कर लेकिन,
अपने कदमों को ज़मीं से मिलाकर रखना ।।
छाव में माना सुकून मिलता है बहुत,
फिर भी धूप में खुद को जलाकर रखना ।।
उम्रभर साथ तो रिश्ते नहीं रहते,
यादों में हर किसी को जिन्दा रखना ।।
वक्त के साथ चलते-चलते, खो न जाना,
खुद को दुनिया से छिपाकर रखना ।।
रातभर जाग कर रोना चाहो जो कभी,
अपने चेहरे को दोस्तों से छिपाकर रखना ।।
तूफानों को कब तक रोक सकोगे तुम,
कश्ती और मांझी का याद पता रखना ।।
हर कहीं जिन्दगी एक सी ही होती है,
अपने ज़ख्मों को अपनों को बताकर रखना ।।
मन्दिरों में ही मिलते हों भगवान जरूरी नहीं,
हर किसी से रिश्ता बना कर रखना ।।
मरना जीना बस में कहां है अपने,
हर पल में जिन्दगी का लुफ्त उठाए रखना ।।
दर्द कभी आखरी नहीं होता,
अपनी आंखों में अश्कों को बचाकर रखना ।।
सूरज तो रोज ही आता है मगर,
अपने दिलो में दीप जलाकर रखना ।।
Monday, August 3, 2009
तेरी हर सांस में हूं मैं
तेरी हर सांस में हूं मैं
तेरी हर धड़कन में हूं मैं
तेरी हर आस में हूं मैं
तेरी हर तड़पन में हूं मैं
तेरी सुबह, शाम और दिन
तेरी हर रात में हूं मैं
तेरी हर बात
तेरे हर लफ्ज़ में हूं मैं
तेरी हर दुआ
तेरे गीत में हूं मैं
तेरे हर ख्वाब
तेरी हर हकीकत में हूं मैं
फिर भी तू कहता है कि
कहां हूं मैं
अरे पगले झांक अपने ही अंदर
तेरी नस नस में हूं मैं
तेरी हर धड़कन में हूं मैं
तेरी हर आस में हूं मैं
तेरी हर तड़पन में हूं मैं
तेरी सुबह, शाम और दिन
तेरी हर रात में हूं मैं
तेरी हर बात
तेरे हर लफ्ज़ में हूं मैं
तेरी हर दुआ
तेरे गीत में हूं मैं
तेरे हर ख्वाब
तेरी हर हकीकत में हूं मैं
फिर भी तू कहता है कि
कहां हूं मैं
अरे पगले झांक अपने ही अंदर
तेरी नस नस में हूं मैं
गिले शिकवे पर आंसू बहते रहे
मैं कहता रहा वो सुनते रहे
गिले शिकवे पर आंसू बहते रहे
नाव चलती रही दरिया बहती रही
हवा चलती रही सनसनाती रही
दूर कहीं दूसरी नाव पर
मांझी विरह गीत गाता रहा
यादों का झरना बहता रहा
पवन वेग से था चलता रहा
खामोश पेड़ों की डालियों पर
चकवा चकवी को मनाता रहा
दोनों किनारे नदी घाट पर
मृगों की टोली वहां पर खड़ा
हमारे मिलन की इस घड़ी पर
चक्षुओं से मोती गिराते रहे
हर शब्द पर होश खोते रहे
मैं कहता रहा वो सुनते रहे
गिले शिकवे पर आंसू बहते रहे
कीमती आंसुओं को बस पीते रहे
नहीं होश था कुछ तन और बदन का
फूलों से पंखुड़ी भी गिरते रहे
हर ओर माहौल गमगीन था
पर नज़ारा कुदरत का रंगीन था
कल-कल करती हुई एक दरिया
अपने ही पथ पर तल्लीन था
हमारी दशा देख एक बादल का टुकड़ा
लहराते हुए आया सीधे ज़मीन पर
ढंका उसने दोनों को आंचल से अपने
स्नेह की बूंदे हम पर गिरा कर
बादल के आंचल में लिपटे हुए हम
परी लोक में थे विचरते रहे
मैं कहता रहा वे सुनते रहे
गिले शिकवे पर आंसू बहते रहे।
गिले शिकवे पर आंसू बहते रहे
नाव चलती रही दरिया बहती रही
हवा चलती रही सनसनाती रही
दूर कहीं दूसरी नाव पर
मांझी विरह गीत गाता रहा
यादों का झरना बहता रहा
पवन वेग से था चलता रहा
खामोश पेड़ों की डालियों पर
चकवा चकवी को मनाता रहा
दोनों किनारे नदी घाट पर
मृगों की टोली वहां पर खड़ा
हमारे मिलन की इस घड़ी पर
चक्षुओं से मोती गिराते रहे
हर शब्द पर होश खोते रहे
मैं कहता रहा वो सुनते रहे
गिले शिकवे पर आंसू बहते रहे
कीमती आंसुओं को बस पीते रहे
नहीं होश था कुछ तन और बदन का
फूलों से पंखुड़ी भी गिरते रहे
हर ओर माहौल गमगीन था
पर नज़ारा कुदरत का रंगीन था
कल-कल करती हुई एक दरिया
अपने ही पथ पर तल्लीन था
हमारी दशा देख एक बादल का टुकड़ा
लहराते हुए आया सीधे ज़मीन पर
ढंका उसने दोनों को आंचल से अपने
स्नेह की बूंदे हम पर गिरा कर
बादल के आंचल में लिपटे हुए हम
परी लोक में थे विचरते रहे
मैं कहता रहा वे सुनते रहे
गिले शिकवे पर आंसू बहते रहे।
मुझे मौसम की तरह बदलना नहीं आता
लोग रूठ जाते हैं मुझसे, मुझे मनाना नहीं आता!
मैं चाहता हूं क्या, मुझे जाताना नहीं आता!
आंसुओं को पीना पुरानी आदत है
मुझे आंसू बहाना नहीं आता!
लोग कहते हैं मेरा दिल है पत्थर का
इसलिए इसको पिघलाना नहीं आता !
अब क्या कहूं मैं क्या आता है, क्या नहीं आता!
बस मुझे मौसम की तरह, बदलना नहीं आता!
हर पल हर लम्हा जिंदगी का, कीमती है दोस्तो
समेटकर बाहों में इन्हें, मीठी यादें बनाते रहो,
कभी लगे जब जिंदगी मायूस सी उदास सी,
खोलकर बाहें अपनी, ख़ुशी के पल लुटाते रहो,
तुम बस मुस्कुराते रहो...
दिल से ढूंढो तो पाओगे, हर साज़ जिंदगी में,
जोड़कर इन साज़ों को, गीत ख़ुशी के बनाते रहो,
कभी जब गिरने को हो आंसू आंखों से,
बंद कर आंखें अपनी, ख़ुशी के ये गीत गाते रहो,
तुम बस मुस्कुराते रहो...
मैं चाहता हूं क्या, मुझे जाताना नहीं आता!
आंसुओं को पीना पुरानी आदत है
मुझे आंसू बहाना नहीं आता!
लोग कहते हैं मेरा दिल है पत्थर का
इसलिए इसको पिघलाना नहीं आता !
अब क्या कहूं मैं क्या आता है, क्या नहीं आता!
बस मुझे मौसम की तरह, बदलना नहीं आता!
हर पल हर लम्हा जिंदगी का, कीमती है दोस्तो
समेटकर बाहों में इन्हें, मीठी यादें बनाते रहो,
कभी लगे जब जिंदगी मायूस सी उदास सी,
खोलकर बाहें अपनी, ख़ुशी के पल लुटाते रहो,
तुम बस मुस्कुराते रहो...
दिल से ढूंढो तो पाओगे, हर साज़ जिंदगी में,
जोड़कर इन साज़ों को, गीत ख़ुशी के बनाते रहो,
कभी जब गिरने को हो आंसू आंखों से,
बंद कर आंखें अपनी, ख़ुशी के ये गीत गाते रहो,
तुम बस मुस्कुराते रहो...
Saturday, August 1, 2009
पति की चिट्ठी रूठी पत्नी के नाम
मैं जुगनू तो तुम ज्योती हो , मैं तांबा तो तुम मोती हो ,
कैसे मिलन हो रानी तुमसे , मैं जागूं तुम सोती हो।
मैं छकड़ा तो तुम गाड़ी हो , मैं फटी पैंट तुम साड़ी हो ,
तुम सुंदर फूल मैं कांटा हूं , तुम मधुर स्पर्श मैं चांटा हूं ,
मैं ग़रीब देश का हूं किसान तुम किसी अमीर की पोती हो ,
कैसे मिलन हो रानी तुमसे मैं जागूं तुम सोती हो।।
मैं चकोर तुम चंदा हो , मैं बोझ तो तुम कंधा हो ,
मैं तबला तुम सारंगी हो , मैं खरबूजा तुम नारंगी हो
ये कैसी विडंबना जीवन की , मैं रोता हूं तुम हंसती हो ,
कैसे मिलन हो रानी तुमसे , मैं जागूं तुम सोती हो ।।
मैं दरिया तो तुम सागर हो , मैं बूंद बूंद तुम गागर हो ,
मैं निर्बल तुम रणचंडी हो , मैं ठेला तो तुम मंडी हो ,
मैं बस में हूं तुम रेल में हो , मैं पैसेंजर तुम मेल में हो ,
मैं एक अंजान सा राही हूं , तुम जानी मानी हस्ती हो ,
कैसे मिलन हो रानी तुम से मैं जागूं तुम सोती हो ।।
मैं बटेर तुम तीतर हो , मैं बाहर हूं तुम भीतर हो ,
मैं चीता हूं तुम शेरनी हो , मैं तोता तो तुम मोरनी हो ,
मैं धरती पर तुम वायुयान में कितनी अच्छी लगती हो ,
कैसे मिलन हो रानी तुमसे मैं जागूं तुम सोती हो ।।
मैं पगडंडी तुम रस्ता हो मैं फूल तुम गुलदस्ता हो ,
मैं साईकिल तुम स्कूटर हो , मैं रिक्शा तो तुम मोटर हो ,
मैं नीचे धरती पर बैठा , तुम ऊंची कुर्सी पर होती हो ,
कैसे मिलन हो रानी तुमसे मैं जागूं तुम सोती हो ।।
मैं मक्खी तुम मधुमक्खी हो , मैं कसैला हूं तुम खट्टी हो ,
मैं नीला करेला कड़वा हूं तुम मीठा सोहन हलवा हो ,
मैं बगुला तो तुम राज हंस हो , मैं सैनिक तुम राजवंश हो ,
मैं खड़ा हुआ गमले में पौधा , तुम तितली बन इतराती हो ,
कैसे मिलन हो रानी तुम से , मैं जागूं तुम सोती हो ।।
अहसास आपके होठों का
न जाने कैसी कशिश है
आपकी इन आंखों में ,
के जब तक यह हमें देखें नहीं ,
ऐसा लगता है
आज कहीं हमें अंधेरे ने घेरा तो नहीं ...
न जाने कैसा सुरूर है
आपकी इस आवाज़ में ,
कि जब तक सुनें नहीं ,
ऐसा लगता है
आज कोई हमें सुनेगा नहीं ...
न जाने कैसा नशा है
आपकी इस हंसी में ,
कि जब तक आप मुस्कुराते नहीं
ऐसा लगता है
कहीं खुशी हमसे रुसवा तो नहीं ...
न जाने कैसा अहसास है
यह आपके होठों का ,
कि जब तक मुझे छूते नहीं
ऐसा लगता है कि
मैं मुझमें नहीं ....
न जाने क्या जादू किया है
आपके इस बेइंतहा प्यार ने ,
कि पता चला है
इससे पहले हम कुछ थे ही नहीं ...
और जबसे मिले हो आप हमें
अब किसी और से मिलने की तमन्ना ही नहीं ...
आपकी इन आंखों में ,
के जब तक यह हमें देखें नहीं ,
ऐसा लगता है
आज कहीं हमें अंधेरे ने घेरा तो नहीं ...
न जाने कैसा सुरूर है
आपकी इस आवाज़ में ,
कि जब तक सुनें नहीं ,
ऐसा लगता है
आज कोई हमें सुनेगा नहीं ...
न जाने कैसा नशा है
आपकी इस हंसी में ,
कि जब तक आप मुस्कुराते नहीं
ऐसा लगता है
कहीं खुशी हमसे रुसवा तो नहीं ...
न जाने कैसा अहसास है
यह आपके होठों का ,
कि जब तक मुझे छूते नहीं
ऐसा लगता है कि
मैं मुझमें नहीं ....
न जाने क्या जादू किया है
आपके इस बेइंतहा प्यार ने ,
कि पता चला है
इससे पहले हम कुछ थे ही नहीं ...
और जबसे मिले हो आप हमें
अब किसी और से मिलने की तमन्ना ही नहीं ...
मैंने भी कबूतर पाले हैं
मैंने भी कबूतर पाले हैं
कुछ भूरे हैं कुछ काले हैं
मैंने भी कबूतर पाले हैं
कुछ राजनीति करते रहते
कुछ गुंडागर्दी वाले हैं
कुछ एक तमंचा रखते हैं
कुछ एक-56 वाले हैं
मैंने भी कबूतर पाले हैं
कुछ भूरे हैं कुछ काले हैं
कुछ दूध मलाई खाते हैं
कुछ बीयर पीने वाले हैं
कुछ सिगरेट पीते रहते हैं
कुछ बीड़ी पे जीने वाले हैं
मैंने भी कबूतर पाले हैं
कुछ भूरे हैं कुछ काले हैं
कुछ जींस टॉप पहनते हैं
कुछ धोती-कुर्ते वाले हैं
कुछ हरिनाम को जपते हैं
कुछ डिस्को-भंगड़ा वाले हैं
मैंने भी कबूतर पाले हैं
कुछ भूरे हैं कुछ काले हैं
कुछ मोटरबाइक से उड़ते हैं
कुछ पैदल चलने वाले हैं
कुछ मोबाइल पर गपते हैं
कुछ चिट्ठी पढ़ने वाले हैं
मैंने भी कबूतर पाले हैं
कुछ भूरे हैं कुछ काले हैं
कुछ आपस में लड़ते रहते हैं
कुछ सीधे, भोले-भाले हैं
पर हैं कमीने सब के सब
देश को खाने वाले हैं
किस्मत के खेल निराले हैं
मैंने भी कबूतर पाले हैं
कुछ भूरे हैं कुछ काले हैं
मैंने भी कबूतर पाले हैं
कुछ भूरे हैं कुछ काले हैं
मैंने भी कबूतर पाले हैं
कुछ राजनीति करते रहते
कुछ गुंडागर्दी वाले हैं
कुछ एक तमंचा रखते हैं
कुछ एक-56 वाले हैं
मैंने भी कबूतर पाले हैं
कुछ भूरे हैं कुछ काले हैं
कुछ दूध मलाई खाते हैं
कुछ बीयर पीने वाले हैं
कुछ सिगरेट पीते रहते हैं
कुछ बीड़ी पे जीने वाले हैं
मैंने भी कबूतर पाले हैं
कुछ भूरे हैं कुछ काले हैं
कुछ जींस टॉप पहनते हैं
कुछ धोती-कुर्ते वाले हैं
कुछ हरिनाम को जपते हैं
कुछ डिस्को-भंगड़ा वाले हैं
मैंने भी कबूतर पाले हैं
कुछ भूरे हैं कुछ काले हैं
कुछ मोटरबाइक से उड़ते हैं
कुछ पैदल चलने वाले हैं
कुछ मोबाइल पर गपते हैं
कुछ चिट्ठी पढ़ने वाले हैं
मैंने भी कबूतर पाले हैं
कुछ भूरे हैं कुछ काले हैं
कुछ आपस में लड़ते रहते हैं
कुछ सीधे, भोले-भाले हैं
पर हैं कमीने सब के सब
देश को खाने वाले हैं
किस्मत के खेल निराले हैं
मैंने भी कबूतर पाले हैं
कुछ भूरे हैं कुछ काले हैं
मैंने भी कबूतर पाले हैं
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