अच्छाई ही एकमात्र ऐसा निवेश है जिससे लाभांश जरूर मिलता है।
गलतियां आपका अनुभव बढ़ाती हैं और अनुभव आपकी गलतियां कम करता है। अगर आप अपनी गलतियों से सीखते हैं तो लोग अपकी सफलता से सीखेंगे।
वक्त अच्छा चल रहा हो तो आपकी गलतियों को भी जोक समझा जाता है , लेकिन वक्त बुरा चल रहा हो तो अपके जोक्स को भी गलत समझा जाता है।
पेड़ हमें सिखाते हैं कि जीवन में संतुलन कैसे बनाए रखें। पेड़ जमीन में मजबूती से जमे होते हैं और इसके साथ ही आसामन को छूने की कोशिश भी करते हैं।
‘ चिंता मत करो अगर दूसरे आपको नहीं समझते। चिंता सिर्फ तब करो जब आप खुद अपने आप को नहीं समझते। ‘
लाइफ एक बहुत बड़ा ट्रैवल ट्रिप है। इसके लिए कोई मैप ( नक्शा ) नहीं , हमें मंजिल तक पहुंचले के लिए अपना रास्ता खुद तलाशना होता है।
सफलता आपकी परछाई की तरह है। उसको पकड़ने की कोशिश मत कीजिए , अपने रास्ते चलते जाइए , वह खुद ब खुद आपको फॉलो करेगी। हमेशा परछाई वाली बात याद रखे।
Friday, July 2, 2010
एक दोस्त ने दूसरे से कहा
एक दोस्त ने दूसरे से कहा- क्या होगा अगर मैं तुम्हारा विश्वास तोड़ दूं। उसने कहा- तुम पर विश्वास करना मेरा फैसला था और उस बनाए रखना या तोड़ना तुम्हार फैसला है...
Thursday, January 14, 2010
चारों ओर शोर है,
चारों ओर शोर है,
मंहगाई का ज़ोर है,
आम आदमी इसके बीच,
देखो,कितना कमज़ोर है।
आमदनी पड़ गई है कम,
खर्चा हो गया है ज़्यादा,
फिर भी भ्रष्ट नेताओं को,
कुछ समझ में नहीं है आता।
दाल चीनी के हैं दाम बढ़े,
प्याज़-टमाटर को भी ना छोड़ा,
इस बढ़ती माहंगाई ने तो ,
आम आदमी को है झिंझोड़ा।
हर चीज़ में लगा दिया TAX ,
अब कैसे होगा, आदमी RELAX ,
पब्लिक ट्रांसपोर्ट के किराए बढ़ाए,
उसके लिए बहुत THANKS।
घी तेल भी नहीं रहे PURE ,
धांधली तो बढ़ रही है MORE ,
कहां से आम आदमी सोच सके,
कैसे करे FUTURE SECURE ।
बिजली पानी के दाम बढ़ा दिए,
नहीं रहा अब जीवन भी सस्ता ,
अस्पताल में दवा के दाम से,
मरीज़ों की भी हालत की ख़स्ता।
नेता लोग तो अपनी ,जेब हैं भर रहे,
न देखते वे तो किसी की ओर,
महंगाई के VIRUS से न जाने ,
आम आदमी कैसे होगा CURE ।।
मंहगाई का ज़ोर है,
आम आदमी इसके बीच,
देखो,कितना कमज़ोर है।
आमदनी पड़ गई है कम,
खर्चा हो गया है ज़्यादा,
फिर भी भ्रष्ट नेताओं को,
कुछ समझ में नहीं है आता।
दाल चीनी के हैं दाम बढ़े,
प्याज़-टमाटर को भी ना छोड़ा,
इस बढ़ती माहंगाई ने तो ,
आम आदमी को है झिंझोड़ा।
हर चीज़ में लगा दिया TAX ,
अब कैसे होगा, आदमी RELAX ,
पब्लिक ट्रांसपोर्ट के किराए बढ़ाए,
उसके लिए बहुत THANKS।
घी तेल भी नहीं रहे PURE ,
धांधली तो बढ़ रही है MORE ,
कहां से आम आदमी सोच सके,
कैसे करे FUTURE SECURE ।
बिजली पानी के दाम बढ़ा दिए,
नहीं रहा अब जीवन भी सस्ता ,
अस्पताल में दवा के दाम से,
मरीज़ों की भी हालत की ख़स्ता।
नेता लोग तो अपनी ,जेब हैं भर रहे,
न देखते वे तो किसी की ओर,
महंगाई के VIRUS से न जाने ,
आम आदमी कैसे होगा CURE ।।
दिल तोड़ा था
दिल तोड़ा था जिसने, उसे देखने की ख्वाहिश नहीं है
शायरी थी वो ख़ुद, कि अब शायरी की ख्वाहिश नहीं है।
लिख रहा हूं पर लिखने की ख्वाहिश न रही
तू नहीं पर किसी और की भी ख्वाहिश न रही।
मेरा प्यार तेरी खूबसूरती के लायक न था
गम न कर तू, मेरा ये दिल ही तेरे लायक न था,
अफ़सोस कि तुझे जी भर कर देख न सका
खो दिया तुझे कि तुझे देखने के लायक न था।
डूब रहा हूं भंवर में पर तेरी किश्ती बनी रहे
मेरी तकदीर में न सही पर तेरी खुशी बनी रहे।
तेरी हर मुस्कराहट के लिए मेरी ये दीवानगी बनी रहे
पलकों में न सही पर मेरे दिल में तेरी वो हंसी बनी रहे।
तेरी आंखों से चुपचाप कुछ मोती चुरा लूं
दुनिया के हर दुःख से कैसे तुझे बचा लूं?
तुझे कोई खुशी तो न दे पाऊंगा,
लेकिन दुआ है कि गम तेरे सारे मैं अपने दिल में छिपा लूं।
दिल तोड़ा था जिसने, उसे देखने की ख्वाहिश नहीं है
शायरी थी वो ख़ुद, कि अब शायरी की ख्वाहिश नहीं है।
शायरी थी वो ख़ुद, कि अब शायरी की ख्वाहिश नहीं है।
लिख रहा हूं पर लिखने की ख्वाहिश न रही
तू नहीं पर किसी और की भी ख्वाहिश न रही।
मेरा प्यार तेरी खूबसूरती के लायक न था
गम न कर तू, मेरा ये दिल ही तेरे लायक न था,
अफ़सोस कि तुझे जी भर कर देख न सका
खो दिया तुझे कि तुझे देखने के लायक न था।
डूब रहा हूं भंवर में पर तेरी किश्ती बनी रहे
मेरी तकदीर में न सही पर तेरी खुशी बनी रहे।
तेरी हर मुस्कराहट के लिए मेरी ये दीवानगी बनी रहे
पलकों में न सही पर मेरे दिल में तेरी वो हंसी बनी रहे।
तेरी आंखों से चुपचाप कुछ मोती चुरा लूं
दुनिया के हर दुःख से कैसे तुझे बचा लूं?
तुझे कोई खुशी तो न दे पाऊंगा,
लेकिन दुआ है कि गम तेरे सारे मैं अपने दिल में छिपा लूं।
दिल तोड़ा था जिसने, उसे देखने की ख्वाहिश नहीं है
शायरी थी वो ख़ुद, कि अब शायरी की ख्वाहिश नहीं है।
बौना हूं मैं
बौना हूं मैं, कोई खिलौना नहीं
चलता हूं जब भी मैं सड़कों पे, तो नज़रें खुद-ब-खुद झुक जाती हैं,
जब उठती है, तो देखता हूं कि इंसान की नज़रें किस तरह से सताती हैं,
भूल जाते हैं वो कि
बौना हूं मैं, कोई खिलौना नहीं !
हंसते हैं वे मुझपे, जैसे मैं कोई एक नुमाइश हूं ,
याद दिलाओ उन्हें, कि मैं भी खुदा की पैदाइश हूं,
कभी नाटा-नाटा,तो कभी बौना-बौना कह कर चिढ़ाते हैं,
भूल जाते हैं वो कि
बौना हूं मैं, कोई खिलौना नहीं !!
शुक्र है, क्योंकि इस नाम पर ही तो मैं अपनी ज़िन्दगी बिताता हूं ,
हंसाता हूं उन्हें सर्कस में और बौना-बौना कहलाता हूं ,
दो वक़्त की रोटी मिल जाती है, पर ज़िन्दगी तड़पाती है
फ़रियाद करता हूं, खुदा से और बोलता हूं उस इंसान से
कि क्यों भूल जाता है तू
बौना हूं मैं कोई खिलौना नहीं !!
चलता हूं जब भी मैं सड़कों पे, तो नज़रें खुद-ब-खुद झुक जाती हैं,
जब उठती है, तो देखता हूं कि इंसान की नज़रें किस तरह से सताती हैं,
भूल जाते हैं वो कि
बौना हूं मैं, कोई खिलौना नहीं !
हंसते हैं वे मुझपे, जैसे मैं कोई एक नुमाइश हूं ,
याद दिलाओ उन्हें, कि मैं भी खुदा की पैदाइश हूं,
कभी नाटा-नाटा,तो कभी बौना-बौना कह कर चिढ़ाते हैं,
भूल जाते हैं वो कि
बौना हूं मैं, कोई खिलौना नहीं !!
शुक्र है, क्योंकि इस नाम पर ही तो मैं अपनी ज़िन्दगी बिताता हूं ,
हंसाता हूं उन्हें सर्कस में और बौना-बौना कहलाता हूं ,
दो वक़्त की रोटी मिल जाती है, पर ज़िन्दगी तड़पाती है
फ़रियाद करता हूं, खुदा से और बोलता हूं उस इंसान से
कि क्यों भूल जाता है तू
बौना हूं मैं कोई खिलौना नहीं !!
ख़ता किसकी नहीं
ख़ता किसकी नहीं मालूम तुम्हारी है या मेरी है
मगर कुछ तो हुआ ही है हुई जो आज दूरी है ||
चले आए तेरी बाहों में तजकर लाज दुनिया की
बनाया हमसफ़र तुमको मिटाकर रस्म दुनिया की ||
सोचा था मुक़द्दर से मिले तुम मुझको चमकाने
गुमां ये था नहीं हमको ये पल दो पल के बहलावे ||
तुम्हारा ख्वाब आंखों में सजाकर हम चले थे यूं
चला हो ज्यों फकीरा कोई अपनी फाकामस्ती में ||
हुआ हमको गरब था ये बड़े हम भाग्यशाली हैं
क़ि जिसकी झोली में आई इक खुशियों की डाली है ||
अगर होता गुमां ये तो नहीं दिल तुमको देते हम
हरेक अपनी खुशी को यूं नहीं तुम पर लुटाते हम।।
मगर कुछ तो हुआ ही है हुई जो आज दूरी है ||
चले आए तेरी बाहों में तजकर लाज दुनिया की
बनाया हमसफ़र तुमको मिटाकर रस्म दुनिया की ||
सोचा था मुक़द्दर से मिले तुम मुझको चमकाने
गुमां ये था नहीं हमको ये पल दो पल के बहलावे ||
तुम्हारा ख्वाब आंखों में सजाकर हम चले थे यूं
चला हो ज्यों फकीरा कोई अपनी फाकामस्ती में ||
हुआ हमको गरब था ये बड़े हम भाग्यशाली हैं
क़ि जिसकी झोली में आई इक खुशियों की डाली है ||
अगर होता गुमां ये तो नहीं दिल तुमको देते हम
हरेक अपनी खुशी को यूं नहीं तुम पर लुटाते हम।।
जिंदगी तेरे बगैर
कट रही है इस तरह से ये जिंदगी तेरे बगैर
सांस भी जैसे मेरी है रुक गई तेरे बगैर
इस ग़म-ए-दुनिया का करना चाहता हूं शुक्रिया
जी रहा हूं देख लो मैं आज भी तेरे बगैर
तूने छोड़ा था मुझे जिस राह पर ऐ जिंदगी
हूं अकेला ही खड़ा अब भी वहीं तेरे बगैर
चाहता हूं मेरा गम जाहिर ना हो पाए कभी
हंस रहा हूं देख लो हिम्मत मेरी तेरे बगैर
मेरी तन्हाई पे देखो चांद भी रोता है अक्सर
आंसुओं से भीगती है अब चांदनी तेरे बगैर
तू ख्वाब में आएगी मेरे रात है कह रही
क्या करूं आती नही पर नींद भी तेरे बगैर
झूठे दिलासे मिलन के दे ना अब कोई मुझे
हर आस मुझको झूठ सी लग रही तेरे बगैर
तेरे वादे झूठ थे नादान इतना जानता है
अब तो मुझे ये जिंदगी है काटनी तेरे बगैर
सांस भी जैसे मेरी है रुक गई तेरे बगैर
इस ग़म-ए-दुनिया का करना चाहता हूं शुक्रिया
जी रहा हूं देख लो मैं आज भी तेरे बगैर
तूने छोड़ा था मुझे जिस राह पर ऐ जिंदगी
हूं अकेला ही खड़ा अब भी वहीं तेरे बगैर
चाहता हूं मेरा गम जाहिर ना हो पाए कभी
हंस रहा हूं देख लो हिम्मत मेरी तेरे बगैर
मेरी तन्हाई पे देखो चांद भी रोता है अक्सर
आंसुओं से भीगती है अब चांदनी तेरे बगैर
तू ख्वाब में आएगी मेरे रात है कह रही
क्या करूं आती नही पर नींद भी तेरे बगैर
झूठे दिलासे मिलन के दे ना अब कोई मुझे
हर आस मुझको झूठ सी लग रही तेरे बगैर
तेरे वादे झूठ थे नादान इतना जानता है
अब तो मुझे ये जिंदगी है काटनी तेरे बगैर
दिल की नादानियां क्या समझ लीजिए
दिल की नादानियां क्या समझ लीजिए
घड़ी भर की मुलाकात और मचल लीजिए
राहें हैं मुश्किल ये माना हमने
इस ख़ौफ़ से क्या, मंज़िल बदल लीजिए
इश्क़ में बर्बाद मुक़र्रर था होना
होश हो तब तो, खुद को सम्भल लीजिए
जब आ ही गए तो दीदार-ए-सनम हो के रहेगा
यार की गली से क्या यूं ही निकल लीजिए
बने हैं रकीब नासेह मुहब्बत की राह में
या रब अब क्या उनकी भी दखल लीजिए
घड़ी भर की मुलाकात और मचल लीजिए
राहें हैं मुश्किल ये माना हमने
इस ख़ौफ़ से क्या, मंज़िल बदल लीजिए
इश्क़ में बर्बाद मुक़र्रर था होना
होश हो तब तो, खुद को सम्भल लीजिए
जब आ ही गए तो दीदार-ए-सनम हो के रहेगा
यार की गली से क्या यूं ही निकल लीजिए
बने हैं रकीब नासेह मुहब्बत की राह में
या रब अब क्या उनकी भी दखल लीजिए
चंदा सी तुम
खिले फूल सी सुन्दर सी तुम
रात चांदनी चंदा सी तुम
शीतल पवन चली हो वैसी
शुद्ध सीप में मोती जैसी
कंचन तन से चंचल मन की
किसी ताल में खिले कमल सी
मनमोहक है वाणी उसकी
ठान लिया जो मन में करती
कांटे हों या फिसलन पथ पर
नहीं रुकी है नहीं रुकेगी
आन बान व शान से जीना
जीवन पथ पर सरपट चलती
वही तुम्हीं हो वही तुम्हीं थी
रात चांदनी चंदा सी तुम
शीतल पवन चली हो वैसी
शुद्ध सीप में मोती जैसी
कंचन तन से चंचल मन की
किसी ताल में खिले कमल सी
मनमोहक है वाणी उसकी
ठान लिया जो मन में करती
कांटे हों या फिसलन पथ पर
नहीं रुकी है नहीं रुकेगी
आन बान व शान से जीना
जीवन पथ पर सरपट चलती
वही तुम्हीं हो वही तुम्हीं थी
Wednesday, November 25, 2009
दिन कटता है रात
दिन कटता है रात कटती नहीं,
दिल से तुम्हारी तस्वीर हटती नहीं,
मत पूछो मैं क्यों खो जाता हूं ख्यालों में,
क्योंकि इंतजार की घड़ी कभी घटती नहीं !
पूछता हूं हवाओं से क्या वे तुम्हें छू के आए हैं,
करके स्पर्श तुम्हारा क्या संदेश लाए हैं,
पूछता हूं बादलों से सभी पर नज़र रखते हो,
क्या कभी मेरी प्रेयसी की भी खबर रखते हो,
अबके जाओ यह संदेश प्रियतम को दे देना,
दिन कट जाता है रात कटती नहीं,
इंतजार की घड़ियां बढ़ती हैं, घटती नहीं,
तस्वीर तुम्हारी सज़ा के रखी है दिल पर
कभी दिल से उतरती नहीं !!
दिल से तुम्हारी तस्वीर हटती नहीं,
मत पूछो मैं क्यों खो जाता हूं ख्यालों में,
क्योंकि इंतजार की घड़ी कभी घटती नहीं !
पूछता हूं हवाओं से क्या वे तुम्हें छू के आए हैं,
करके स्पर्श तुम्हारा क्या संदेश लाए हैं,
पूछता हूं बादलों से सभी पर नज़र रखते हो,
क्या कभी मेरी प्रेयसी की भी खबर रखते हो,
अबके जाओ यह संदेश प्रियतम को दे देना,
दिन कट जाता है रात कटती नहीं,
इंतजार की घड़ियां बढ़ती हैं, घटती नहीं,
तस्वीर तुम्हारी सज़ा के रखी है दिल पर
कभी दिल से उतरती नहीं !!
Monday, November 9, 2009
जब मुझे नज़र आया मौत का रास्ता,
जब मुझे नज़र आया मौत का रास्ता,
तब सबने मुझे आगे बढ़ने से रोका,
ज़िंदगी की राह में,
मौत ने आकर दी दस्तक,
सबने मौत का दामन थामने से रोका,
खुशियों को छीनकर दुख देने वालों ने हमें,
अपनी मंज़िल के करीब पाकर हमें आगे जाने से रोका,
मौत ही ज़िंदगी की आख़िरी मंज़िल होती है,
यह जानकर भी अनजान बने रहने का हमने सोचा!
मौत की मंज़िल मिली,
जब चले हम उसे अपनाने,
तब हमारे अपनों ने हमारी राह में कांटे बिछाए,
इतनी जल्दी ये मौत की राह पर ना जाए !
हम इन्हें और सताएं,
इनके दुखों को और बढ़ाए,
चैन की मौत क्यों इन्हें नसीब होने पाए!
जब मिला मुझे मौत का रास्ता,
अपनों ने मुझे आगे बढ़ने से रोका ।।
तब सबने मुझे आगे बढ़ने से रोका,
ज़िंदगी की राह में,
मौत ने आकर दी दस्तक,
सबने मौत का दामन थामने से रोका,
खुशियों को छीनकर दुख देने वालों ने हमें,
अपनी मंज़िल के करीब पाकर हमें आगे जाने से रोका,
मौत ही ज़िंदगी की आख़िरी मंज़िल होती है,
यह जानकर भी अनजान बने रहने का हमने सोचा!
मौत की मंज़िल मिली,
जब चले हम उसे अपनाने,
तब हमारे अपनों ने हमारी राह में कांटे बिछाए,
इतनी जल्दी ये मौत की राह पर ना जाए !
हम इन्हें और सताएं,
इनके दुखों को और बढ़ाए,
चैन की मौत क्यों इन्हें नसीब होने पाए!
जब मिला मुझे मौत का रास्ता,
अपनों ने मुझे आगे बढ़ने से रोका ।।
Monday, November 2, 2009
तुम हो जैसे शीतल छाया
तुम हो जैसे शीतल छाया
पर अब धूप ही जीवन अपना,
प्यार जो मैंने तुमसे पाया
अब वो मात्र बना इक सपना।
हो अजगर की हरकत जैसे
यह रिश्ता मन बहलाता है,
अंग को चीरेगा तो फिर भी
खंजर अब यह सहलाता है।
ऋतु में जो सर्दी होवे तो
धूप भी मन को भा जाती है
मगर नहीं वो जीवन देती
सरिता जो तरसा जाती है
तन वो नहीं प्राप्त कर सकता
जिसको मन ने है अपनाया
फिर भी यादों के फूलों पर
तुम हो जैसे शीतल छाया।
तुम जो मेरी बात को सुन लो
तो हर वाक्य, गान हो जाए
पर यह गीत अधर में ठहरा
कौन इसे अब आकर गाए
इस बंजर में वृक्ष लगाना
ऐसा देख रही हो सपना
मैं भी चाहूं छांव में सोना
पर अब धूप ही जीवन अपना
कभी कभी बिन वर्षा के भी
बादल मन ललचाने आते
सब वो नहीं याद रह पाते
गीत जो प्रेमी मिल कर गाते
बिन अस्तित्व का जीवन यह था
बस उलझन में ही मन यह था
जीवन गीत हृदय ने गाया
प्यार जो मैंने तुमसे पाया।
ऐसा प्यार जिसे पा कर ही
सबकुछ हासिल हो जाता है
एक वो ही क्षण तो जीवन है
जिसमें मानव खो जाता है
सब के भाग्य में भी ना होता
दो धड़कन का साथ में चलना
बिल्कुल यूं ही संग था अपना
अब वो मात्र बना इक सपना
मैं तो सब कुछ भूल चुका था
बस पागल हिरन के जैसे
कस्तूरी को ढूंढ रहा था
भाग रहा जीवन से जैसे
पर कब जाग उठी यह ज्वाला
नाच उठा मन उन्मद माए से
जकड़ गया मन डोर में प्रीत की
हो अजगर की हरकत जैसे।
क्या तुम सच को बोल सकोगी
व्याकुल हो अंतर यह बोले
क्या मैं सच को मान सकूंगा बस यह
प्रश्न अनंत टटोले
हर दिन इन बातों से हटकर
मन दुनिया में खो जाता है
जब भी कोई चोट लग जाती
यह रिश्ता मन बहलाता है।
तुमसे यदि विदा भी ले लूं
ना मैं तुम को भूल सकूंगा
तुम हो मुझमें प्राण की भांति
हर पल बस मैं शूल सहूंगा
ऐसे ही इक दिन जीवन में
बिन दस्तक के तुम आ ठहरी
उस दिन ना मैं जान सका था
चोट लगी थी कितनी गहरी
तीर अभी काया में स्थिर ही
कितना भी ना उसको देखूं
अंग तो चीरेगा वो फिर भी
इक दिन सखा मिलन भी होगा
कितना क्रूर हो भाग्या विधाता
मन और मन तो एक हुए हैं
तन और तन का कैसा नाता
पर संसार बड़ा ही निर्दय
कब यह प्रेम समझ पाता है
इक दिन हृदय रक्त पीने को
खंजर अब यह सहलाता है
पर अब धूप ही जीवन अपना,
प्यार जो मैंने तुमसे पाया
अब वो मात्र बना इक सपना।
हो अजगर की हरकत जैसे
यह रिश्ता मन बहलाता है,
अंग को चीरेगा तो फिर भी
खंजर अब यह सहलाता है।
ऋतु में जो सर्दी होवे तो
धूप भी मन को भा जाती है
मगर नहीं वो जीवन देती
सरिता जो तरसा जाती है
तन वो नहीं प्राप्त कर सकता
जिसको मन ने है अपनाया
फिर भी यादों के फूलों पर
तुम हो जैसे शीतल छाया।
तुम जो मेरी बात को सुन लो
तो हर वाक्य, गान हो जाए
पर यह गीत अधर में ठहरा
कौन इसे अब आकर गाए
इस बंजर में वृक्ष लगाना
ऐसा देख रही हो सपना
मैं भी चाहूं छांव में सोना
पर अब धूप ही जीवन अपना
कभी कभी बिन वर्षा के भी
बादल मन ललचाने आते
सब वो नहीं याद रह पाते
गीत जो प्रेमी मिल कर गाते
बिन अस्तित्व का जीवन यह था
बस उलझन में ही मन यह था
जीवन गीत हृदय ने गाया
प्यार जो मैंने तुमसे पाया।
ऐसा प्यार जिसे पा कर ही
सबकुछ हासिल हो जाता है
एक वो ही क्षण तो जीवन है
जिसमें मानव खो जाता है
सब के भाग्य में भी ना होता
दो धड़कन का साथ में चलना
बिल्कुल यूं ही संग था अपना
अब वो मात्र बना इक सपना
मैं तो सब कुछ भूल चुका था
बस पागल हिरन के जैसे
कस्तूरी को ढूंढ रहा था
भाग रहा जीवन से जैसे
पर कब जाग उठी यह ज्वाला
नाच उठा मन उन्मद माए से
जकड़ गया मन डोर में प्रीत की
हो अजगर की हरकत जैसे।
क्या तुम सच को बोल सकोगी
व्याकुल हो अंतर यह बोले
क्या मैं सच को मान सकूंगा बस यह
प्रश्न अनंत टटोले
हर दिन इन बातों से हटकर
मन दुनिया में खो जाता है
जब भी कोई चोट लग जाती
यह रिश्ता मन बहलाता है।
तुमसे यदि विदा भी ले लूं
ना मैं तुम को भूल सकूंगा
तुम हो मुझमें प्राण की भांति
हर पल बस मैं शूल सहूंगा
ऐसे ही इक दिन जीवन में
बिन दस्तक के तुम आ ठहरी
उस दिन ना मैं जान सका था
चोट लगी थी कितनी गहरी
तीर अभी काया में स्थिर ही
कितना भी ना उसको देखूं
अंग तो चीरेगा वो फिर भी
इक दिन सखा मिलन भी होगा
कितना क्रूर हो भाग्या विधाता
मन और मन तो एक हुए हैं
तन और तन का कैसा नाता
पर संसार बड़ा ही निर्दय
कब यह प्रेम समझ पाता है
इक दिन हृदय रक्त पीने को
खंजर अब यह सहलाता है
ये ताल्लुकात, ये रिश्ते
ये ताल्लुकात, ये रिश्ते , ये दोस्ती, ये साथ
ये हमदर्दियां, ये वादे, कांधे पे ऐतबार का हाथ
ये हर बात पे कसमें, ये लम्बी-लम्बी बातें
ये जज्बात, ये तोहफे और बेशकीमती सौगातें
ये खून का वास्ता, ये रिश्ते-नातों का हवाला
ये हमसफ़र, ये हमकदम, ये हमनवां, ये हमप्याला
यकीनन तब तलक हैं जब तक तेरे पास दाने हैं
जिस दिन बिन-दाना हो गया, उस रोज़ से सब बेगाने हैं।।
ये हमदर्दियां, ये वादे, कांधे पे ऐतबार का हाथ
ये हर बात पे कसमें, ये लम्बी-लम्बी बातें
ये जज्बात, ये तोहफे और बेशकीमती सौगातें
ये खून का वास्ता, ये रिश्ते-नातों का हवाला
ये हमसफ़र, ये हमकदम, ये हमनवां, ये हमप्याला
यकीनन तब तलक हैं जब तक तेरे पास दाने हैं
जिस दिन बिन-दाना हो गया, उस रोज़ से सब बेगाने हैं।।
Saturday, October 31, 2009
मुझसे हाथ मिला मुझसे बात भी कर
मुझसे हाथ मिला मुझसे बात भी कर
मुझसे नाराज भी हो मुलाक़ात भी कर
मेरे नजदीक भी आ मुझसे दूर भी जा
मुझसे मुहब्बत मुझसे फसादात भी कर
कभी मंदिर जा कभी सहेलियों के घर भी
कभी चैन से बैठ कभी खुराफात भी कर
राज छुपा भी ले दिल के राज बता भी दे
गुमसुम भी रह और हंसकर बात भी कर
बेदिल ग़ज़ल भी लिख ले मक़ता भी बना
और मिस्रा-ए-सानी की शुरुआत भी कर
मुझसे नाराज भी हो मुलाक़ात भी कर
मेरे नजदीक भी आ मुझसे दूर भी जा
मुझसे मुहब्बत मुझसे फसादात भी कर
कभी मंदिर जा कभी सहेलियों के घर भी
कभी चैन से बैठ कभी खुराफात भी कर
राज छुपा भी ले दिल के राज बता भी दे
गुमसुम भी रह और हंसकर बात भी कर
बेदिल ग़ज़ल भी लिख ले मक़ता भी बना
और मिस्रा-ए-सानी की शुरुआत भी कर
Wednesday, October 28, 2009
दीप कहीं, कहीं दिल जलते हैं
दीप कहीं, कहीं दिल जलते हैं
खुशियां कहीं, कहीं गम पलते हैं।
कोई अकेला ही बढ़ता है,
साथ किसी के दल चलते हैं।
दीप कहीं, कहीं दिल जलते हैं।
किसी किस्मत में है बस रोना,
कोई बिना बजह ही हंसते हैं।
दर्द का कहर न ढलता देखो
जीवन पल का, ज्यों वर्षों लगते हैं ।।
खुशियां कहीं, कहीं गम पलते हैं।
कोई अकेला ही बढ़ता है,
साथ किसी के दल चलते हैं।
दीप कहीं, कहीं दिल जलते हैं।
किसी किस्मत में है बस रोना,
कोई बिना बजह ही हंसते हैं।
दर्द का कहर न ढलता देखो
जीवन पल का, ज्यों वर्षों लगते हैं ।।
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