जब मुझे नज़र आया मौत का रास्ता,
तब सबने मुझे आगे बढ़ने से रोका,
ज़िंदगी की राह में,
मौत ने आकर दी दस्तक,
सबने मौत का दामन थामने से रोका,
खुशियों को छीनकर दुख देने वालों ने हमें,
अपनी मंज़िल के करीब पाकर हमें आगे जाने से रोका,
मौत ही ज़िंदगी की आख़िरी मंज़िल होती है,
यह जानकर भी अनजान बने रहने का हमने सोचा!
मौत की मंज़िल मिली,
जब चले हम उसे अपनाने,
तब हमारे अपनों ने हमारी राह में कांटे बिछाए,
इतनी जल्दी ये मौत की राह पर ना जाए !
हम इन्हें और सताएं,
इनके दुखों को और बढ़ाए,
चैन की मौत क्यों इन्हें नसीब होने पाए!
जब मिला मुझे मौत का रास्ता,
अपनों ने मुझे आगे बढ़ने से रोका ।।
Monday, November 9, 2009
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