Saturday, September 19, 2009

तेरे लबों की वो मीठी सी मिश्री

तड़पना है मुझको सारी उमर
किया तेरी नजरों ने ऐसा असर

तूने पिलाया है वो जाम-ए-नजर
इस दिल की धड़कन गई है ठहर

भूलूं तुम्हें ये तो मुमकिन नहीं
कहीं भूल जाना न मुझको मगर

तेरे लबों की वो मीठी सी मिश्री
घुलेगी रगों में मेरी ताउमर

नजरों की तेरी वो खामोशियां
बातें करेंगी यूं शाम-ओ-सहर

मुझसे अचानक इस तरह लिपटना
जैसे तुझे हो बिछड़ने का डर

मीठे बहुत हैं लम्हे जो बीते
ये लम्हे मगर बहुत मुख्तसर

समझा था तेरी अदा को मुहब्बत
शायद था नादान मैं इस कदर

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