कट रही है इस तरह से ये जिंदगी तेरे बगैर
सांस भी जैसे मेरी है रुक गई तेरे बगैर
इस ग़म-ए-दुनिया का करना चाहता हूं शुक्रिया
जी रहा हूं देख लो मैं आज भी तेरे बगैर
तूने छोड़ा था मुझे जिस राह पर ऐ जिंदगी
हूं अकेला ही खड़ा अब भी वहीं तेरे बगैर
चाहता हूं मेरा गम जाहिर ना हो पाए कभी
हंस रहा हूं देख लो हिम्मत मेरी तेरे बगैर
मेरी तन्हाई पे देखो चांद भी रोता है अक्सर
आंसुओं से भीगती है अब चांदनी तेरे बगैर
तू ख्वाब में आएगी मेरे रात है कह रही
क्या करूं आती नही पर नींद भी तेरे बगैर
झूठे दिलासे मिलन के दे ना अब कोई मुझे
हर आस मुझको झूठ सी लग रही तेरे बगैर
तेरे वादे झूठ थे नादान इतना जानता है
अब तो मुझे ये जिंदगी है काटनी तेरे बगैर
Thursday, January 14, 2010
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