दिल तोड़ा था जिसने, उसे देखने की ख्वाहिश नहीं है
शायरी थी वो ख़ुद, कि अब शायरी की ख्वाहिश नहीं है।
लिख रहा हूं पर लिखने की ख्वाहिश न रही
तू नहीं पर किसी और की भी ख्वाहिश न रही।
मेरा प्यार तेरी खूबसूरती के लायक न था
गम न कर तू, मेरा ये दिल ही तेरे लायक न था,
अफ़सोस कि तुझे जी भर कर देख न सका
खो दिया तुझे कि तुझे देखने के लायक न था।
डूब रहा हूं भंवर में पर तेरी किश्ती बनी रहे
मेरी तकदीर में न सही पर तेरी खुशी बनी रहे।
तेरी हर मुस्कराहट के लिए मेरी ये दीवानगी बनी रहे
पलकों में न सही पर मेरे दिल में तेरी वो हंसी बनी रहे।
तेरी आंखों से चुपचाप कुछ मोती चुरा लूं
दुनिया के हर दुःख से कैसे तुझे बचा लूं?
तुझे कोई खुशी तो न दे पाऊंगा,
लेकिन दुआ है कि गम तेरे सारे मैं अपने दिल में छिपा लूं।
दिल तोड़ा था जिसने, उसे देखने की ख्वाहिश नहीं है
शायरी थी वो ख़ुद, कि अब शायरी की ख्वाहिश नहीं है।
Thursday, January 14, 2010
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