Tuesday, August 18, 2009

कान्हा के प्यार में मीरा है बन जाना

कान्हा के प्यार में में बन जाना चाहती मीरा,
हर जनम में उनका साथ मुझे है पाना,

कान्हा के नाम जपने में खुद को मुझे है भुलाना,
कान्हा की भक्ति के रंग में खुद को है रंगाना,
कान्हा के प्यार में मीरा है बन जाना !

कान्हा की बांसुरी कि धुन पर उनके साथ रास लीला रचाना,
बांसुरी कि धुन को सुनकर अपनी सुध बुध भुलाना!

कान्हा की छवि मेरे तन-मन को लुभाती,
कान्हा के दर्शन करने को में दौड़ी चली जाती,
कान्हा के प्यार में में मीरा बन जाती !

कान्हा के प्यार में में मीरा बन जाती,
उनका सांवला सलोना रूप देख कर भी
आंखें वहां से नहीं में हटा पाती !

कान्हा के प्रेम में में मीरा बन जाती,
हर तरफ उनको ही देखने को मेरी आंखें हैं ललचाती!


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