हर जनम में उनका साथ मुझे है पाना,
| कान्हा के नाम जपने में खुद को मुझे है भुलाना, कान्हा की भक्ति के रंग में खुद को है रंगाना, |
| कान्हा के प्यार में मीरा है बन जाना ! |
| कान्हा की बांसुरी कि धुन पर उनके साथ रास लीला रचाना, |
| बांसुरी कि धुन को सुनकर अपनी सुध बुध भुलाना! |
| कान्हा की छवि मेरे तन-मन को लुभाती, |
| कान्हा के दर्शन करने को में दौड़ी चली जाती, |
| कान्हा के प्यार में में मीरा बन जाती ! |
| कान्हा के प्यार में में मीरा बन जाती, |
| उनका सांवला सलोना रूप देख कर भी |
| आंखें वहां से नहीं में हटा पाती ! |
| कान्हा के प्रेम में में मीरा बन जाती, |
| हर तरफ उनको ही देखने को मेरी आंखें हैं ललचाती! |
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