लोग रूठ जाते हैं मुझसे, मुझे मनाना नहीं आता!
मैं चाहता हूं क्या, मुझे जाताना नहीं आता!
आंसुओं को पीना पुरानी आदत है
मुझे आंसू बहाना नहीं आता!
लोग कहते हैं मेरा दिल है पत्थर का
इसलिए इसको पिघलाना नहीं आता !
अब क्या कहूं मैं क्या आता है, क्या नहीं आता!
बस मुझे मौसम की तरह, बदलना नहीं आता!
हर पल हर लम्हा जिंदगी का, कीमती है दोस्तो
समेटकर बाहों में इन्हें, मीठी यादें बनाते रहो,
कभी लगे जब जिंदगी मायूस सी उदास सी,
खोलकर बाहें अपनी, ख़ुशी के पल लुटाते रहो,
तुम बस मुस्कुराते रहो...
दिल से ढूंढो तो पाओगे, हर साज़ जिंदगी में,
जोड़कर इन साज़ों को, गीत ख़ुशी के बनाते रहो,
कभी जब गिरने को हो आंसू आंखों से,
बंद कर आंखें अपनी, ख़ुशी के ये गीत गाते रहो,
तुम बस मुस्कुराते रहो...
Monday, August 3, 2009
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