Tuesday, August 18, 2009

तेरी आंखों की कशिश

तेरी आंखों की कशिश मुझे याद है अब तक
तेरी बातों की खलिश मुझे याद है अब तक

तुम पराए हो मगर अपना बनाने की तुम्हें
मेरी नाकाम सी कोशिश मुझे याद है अब तक

मेरे खामोश से दिल में हलचल सी मचाने की
हर रोज नई साजिश मुझे याद है अब तक

चाहा था तुम्हारी मोहब्बत हो मेरा हासिल
पर तारों की वो गर्दिश मुझे याद है अब तक

वो प्यार तुम्हारा था मेरी गलतफहमी
मेरी वो कशमकश मुझे याद है अब तक

भूला नहीं हूं अब तक तगाफुल वो तुम्हारे
और अपनी प्रस्तिश मुझे याद है अब तक

मुझे ये खबर है पूरी होगी ना कभी भी
मेरे दिल की वो ख्वाहिश मुझे याद है अब तक

नादानियों की गिनती बढ़ती ही रही मेरी
तुझसे उल्फत की गुजारिश मुझे याद है अब तक

इकरारे मोहब्बत में होठों की तुम्हारे
हल्की सी वो जुंबिश मुझे याद है अब तक

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