न जाने कैसी कशिश है
आपकी इन आंखों में ,
के जब तक यह हमें देखें नहीं ,
ऐसा लगता है
आज कहीं हमें अंधेरे ने घेरा तो नहीं ...
न जाने कैसा सुरूर है
आपकी इस आवाज़ में ,
कि जब तक सुनें नहीं ,
ऐसा लगता है
आज कोई हमें सुनेगा नहीं ...
न जाने कैसा नशा है
आपकी इस हंसी में ,
कि जब तक आप मुस्कुराते नहीं
ऐसा लगता है
कहीं खुशी हमसे रुसवा तो नहीं ...
न जाने कैसा अहसास है
यह आपके होठों का ,
कि जब तक मुझे छूते नहीं
ऐसा लगता है कि
मैं मुझमें नहीं ....
न जाने क्या जादू किया है
आपके इस बेइंतहा प्यार ने ,
कि पता चला है
इससे पहले हम कुछ थे ही नहीं ...
और जबसे मिले हो आप हमें
अब किसी और से मिलने की तमन्ना ही नहीं ...
Saturday, August 1, 2009
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