सोचता हूं उसे क्या नाम दिया जाए,
जिसने कत्ल किया इनाम दिया जाए ।
आओ बदल दें दुनिया के रीति रिवाज,
जहर के बदले भी जाम दिया जाए ।
ग़रीबों पर ज़ुल्म हमेशा ही रहे हैं इधर,
आओ मिलकर इसे थाम दिया जाए ।।
भ्रष्टाचारी बेईमानी भागकर थक गये,
सोचता हूं सदियों तक आराम दिया जाए।
Tuesday, August 18, 2009
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