Saturday, August 1, 2009

पति की चिट्ठी रूठी पत्नी के नाम

मैं जुगनू तो तुम ज्योती हो , मैं तांबा तो तुम मोती हो ,
कैसे मिलन हो रानी तुमसे , मैं जागूं तुम सोती हो।
मैं छकड़ा तो तुम गाड़ी हो , मैं फटी पैंट तुम साड़ी हो ,
तुम सुंदर फूल मैं कांटा हूं , तुम मधुर स्पर्श मैं चांटा हूं ,
मैं ग़रीब देश का हूं किसान तुम किसी अमीर की पोती हो ,
कैसे मिलन हो रानी तुमसे मैं जागूं तुम सोती हो।।
मैं चकोर तुम चंदा हो , मैं बोझ तो तुम कंधा हो ,
मैं तबला तुम सारंगी हो , मैं खरबूजा तुम नारंगी हो
ये कैसी विडंबना जीवन की , मैं रोता हूं तुम हंसती हो ,
कैसे मिलन हो रानी तुमसे , मैं जागूं तुम सोती हो ।।
मैं दरिया तो तुम सागर हो , मैं बूंद बूंद तुम गागर हो ,
मैं निर्बल तुम रणचंडी हो , मैं ठेला तो तुम मंडी हो ,
मैं बस में हूं तुम रेल में हो , मैं पैसेंजर तुम मेल में हो ,
मैं एक अंजान सा राही हूं , तुम जानी मानी हस्ती हो ,
कैसे मिलन हो रानी तुम से मैं जागूं तुम सोती हो ।।
मैं बटेर तुम तीतर हो , मैं बाहर हूं तुम भीतर हो ,
मैं चीता हूं तुम शेरनी हो , मैं तोता तो तुम मोरनी हो ,
मैं धरती पर तुम वायुयान में कितनी अच्छी लगती हो ,
कैसे मिलन हो रानी तुमसे मैं जागूं तुम सोती हो ।।
मैं पगडंडी तुम रस्ता हो मैं फूल तुम गुलदस्ता हो ,
मैं साईकिल तुम स्कूटर हो , मैं रिक्शा तो तुम मोटर हो ,
मैं नीचे धरती पर बैठा , तुम ऊंची कुर्सी पर होती हो ,
कैसे मिलन हो रानी तुमसे मैं जागूं तुम सोती हो ।।
मैं मक्खी तुम मधुमक्खी हो , मैं कसैला हूं तुम खट्टी हो ,
मैं नीला करेला कड़वा हूं तुम मीठा सोहन हलवा हो ,
मैं बगुला तो तुम राज हंस हो , मैं सैनिक तुम राजवंश हो ,
मैं खड़ा हुआ गमले में पौधा , तुम तितली बन इतराती हो ,
कैसे मिलन हो रानी तुम से , मैं जागूं तुम सोती हो ।।

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